एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर के बीच का अंतर (SDM Aur Deputy Collector Mein Antar)

एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर के बीच का अंतर, एसडीएम क्या पद होता है, डिप्टी कलेक्टर क्या होता है, एसडीएम बनने के लिए योग्यता, डिप्टी कलेक्टर बनने के लिए योग्यता, SDM Ki Salary, Deputy Collector Ki Salary आदि के बीच अंतर जानने के लिए पूरा आर्टिकल ध्यान से पढ़ें।

एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर दोनों को ही प्रशासनिक पद कहते हैं, लेकिन एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर में काफी अंतर होता है। इसलिए आज हम एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर के बीच का अंतर (SDM Aur Deputy Collector Mein Kya Antar Hai) के बारे में चर्चा करेंगे।

इसलिए आज के इस आर्टिकल में एसडीएम क्या होता है, डिप्टी कलेक्टर क्या होता है, एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर के कार्यों के बीच अंतर, एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर की सैलरी के बीच अंतर आदि के बारे में भी आपको समझाएंगे।

एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर क्या होता है? (SDM Aur Deputy Collector Mein Antar)

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एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर में कई अंतर होते हैं, इसलिए सबसे पहले हम जानेंगे कि एसडीएम क्या होता है, डिप्टी कलेक्टर क्या होता है। 

वैसे तो यह दोनों पद प्रशासनिक सेवा के अंतर्गत ही आते हैं लेकिन, यह जानकारी पढ़कर आप इन दोनों पदों के बीच का अंतर समझ पाएंगे।

#1: एसडीएम क्या होता है? (SDM Kya Hota Hai Hindi)

एसडीएम क्या होता है? जानने से पहले आपको एसडीएम का फुल फॉर्म के बारे में बताते हैं। एसडीएम की फुल फॉर्म “Sub Divisional Magistrate” होता है। एसडीएम जिले का दूसरा सबसे बड़ा पद माना जाता है।

आपको तो पता ही होगा कि जब जिले का विभाजन किया जाता है तो सब डिवीजन बनाया जाता है, इसलिए इन सब डिवीजन के प्रशासनिक कार्यों को करने के लिए एसडीएम का पद बनाया गया है।

एसडीएम अपने क्षेत्र में प्रशासनिक कार्यों के लिए जिम्मेदार होता है, इसलिए एसडीएम को बहुत महत्वपूर्ण पद माना जाता है। एसडीएम के कार्यों में लाइसेंस, राजस्व, पंजीकरण जैसे कार्य होते हैं, जिनके बारे में भी हम आगे जानकारी बताएंगे।

#2: डिप्टी कलेक्टर क्या होता है? (Deputy Collector Kya Hota Hai In Hindi)

डिप्टी कलेक्टर को हिंदी में “उप विभागीय मजिस्ट्रेट” कहा जाता है और इसे छोटे रूप में डीसी (DC) भी कहा जाता है। डिप्टी कलेक्टर हमेशा जिले के कलेक्टर के निर्देशों के अनुसार कार्य करता है।

डिप्टी कलेक्टर जिले के कलेक्टर के कई महत्वपूर्ण कार्यों में भी सहायता प्रदान करने का कार्य करता है। डिप्टी कलेक्टर जिला कलेक्टर के हर प्रशासनिक कार्य में भी सहायक होता है।

डिप्टी कलेक्टर के पास भी एसडीएम की तरह कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी होती है, जिनके बारे में भी हम आपको बताएंगे।

एसडीएम कैसे बने और डिप्टी कलेक्टर कैसे बनते हैं? (SDM Kaise Bane Aur Deputy Collector Kaise Bane)

एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर बनने की प्रक्रिया में ज्यादा कुछ अंतर तो नहीं है, लेकिन एसडीएम एग्जाम पैटर्न और सिलेबस तथा डिप्टी कलेक्टर एग्जाम पैटर्न और सिलेबस में अंतर जरूर होता है।

तो आइए एसडीएम कैसे बनते है, डिप्टी कलेक्टर कैसे बनते है। इसके बारे में बात करते है।

#1: एसडीएम कैसे बनते है? (SDM Kaise Bante Hai In Hindi)

एसडीएम की परीक्षा राज्य स्तर की सिविल परीक्षा के आधार पर आयोजित करवाई जाती है, अलग-अलग राज्यों में भिन्न सिविल परीक्षा आयोग होते है जैसे UPPSC, RPSC आदि।

आपको बता दें कि इन परीक्षाओं में बैठने के लिए आपके पास किसी विषय में आपका ग्रेजुएट होना जरूरी है। 

एसडीएम बनने की प्रक्रिया 3 चरणों में होती है जिसमें आपकी प्रारम्भिक परीक्षा, मेन्स परीक्षा और इंटरव्यू होता है। इन सब को पार करने पर एसडीएम का पद दिया जाता है।

#2: डिप्टी कलेक्टर कैसे बनते है? (Deputy Collector Kaise Ban Sakte Hain)

डिप्टी कलेक्टर बनने के लिए भी एसडीएम जैसे योग्यता यानी ग्रेजुएशन होनी चाहिए, हर राज्य की सरकार सिविल सर्विस एग्जाम करवाती है। 

योग्य उम्मीदवार इस परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते है, इस परीक्षा को भी 3 चरणों में पूरा किया जाता है। जिसमें पहले प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू लिया जाता है। 

आपको बता दें कि डिप्टी कलेक्टर और एसडीएम के एग्जाम पैटर्न और एग्जाम सिलेबस में अंतर हो सकता है। तो लिए अब डिप्टी कलेक्टर और एसडीएम की योग्यताओं के बीच अंतर जानते हैं।

एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर की योग्यताओं के बीच अंतर क्या है? (Difference Between SDM And Deputy Collector Qualification In Hindi)

एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर की योग्यताओं के बीच ज्यादा अंतर नहीं है, फिर भी आपको एसडीएम बनने के लिए योग्यता और डिप्टी कलेक्टर बनने के लिए योग्यता के बारे में बताएंगे।

#1: एसडीएम बनने के लिए योग्यता (SDM Banne Ke Liye Kya Yogyata Honi Chahiye)

एसडीएम बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा के बारे में जानने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं को पढ़ें।

  • एसडीएम बनने के लिए आप भारत देश रहने वाले होने चाहिए। 
  • एसडीएम वही व्यक्ति बन सकता है जिसने किसी विषय में ग्रेजुएशन कंप्लीट कर ली हो।
  • आप चाहे साइंस, मेडिकल, अकाउंटिंग आदि जैसे किसी भी क्षेत्र से ग्रेजुएट हो तो, एसडीएम बनने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
  • एसडीएम बनने के लिए आपकी उम्र कम से कम 21 साल और अधिक से अधिक 32 साल होनी चाहिए।
  • इसके अलावा आरक्षित वर्ग वाले उम्मीदवारों, शारीरिक रूप से विकलांग उम्मीदवारों को आयु सीमा में छूट मिलती है।

#2: डिप्टी कलेक्टर बनने के लिए योग्यता (Deputy Collector Qualification In Hindi)

डिप्टी कलेक्टर बनने की योग्यता के बारे में जानने के लिए नीचे दिए गए बिंदुओं को पढ़ें।

  • डिप्टी कलेक्टर बनने के लिए भी ग्रेजुएशन जरूरी होती है।
  • आप अपने पसंद के विषय से ग्रेजुएशन करके इस परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते है।
  • डिप्टी कलेक्टर बनने के लिए उम्मीदवारों की आयु 21 साल से 32 साल तक होनी चाहिए।
  • इसके लिए भी आरक्षित वर्ग और शारीरिक रूप से अपाहिज उम्मीदवारों को छूट मिलती है।

एसडीएम की सैलरी और डिप्टी कलेक्टर की सैलरी (Difference Between SDM And Deputy Collector Salary)

आपको बता दें कि एसडीएम की सैलरी और डिप्टी कलेक्टर की सैलरी में अंतर होता है, साथी साथ एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर को कई अन्य सुविधाएं और भत्ते भी मिलते हैं।

#1: एसडीएम की सैलरी कितनी होती है? (SDM Ki Salary Kitni Hoti Hai Per Month)

एसडीएम की शुरुआती सैलरी 56 हजार रुपए से शुरू होती हैं, लेकिन एसडीएम की कुछ समय बाद सैलरी ज्यादा कर दी जाती है। बाद में एसडीएम को हर महीने 1 लाख रुपए या इससे अधिक की सैलरी मिलती है।

एसडीएम को सैलरी के साथ-साथ अच्छी सरकारी सुविधाएं भी प्रदान की जाती है। एसडीएम और उसके परिवार को रहने के लिए अच्छा घर, एसडीएम की सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी गार्ड, एक सरकारी वाहन आदि की सुविधा मिलती है।

इसके अलावा एसडीएम को फ्री बिजली बिल, फ्री टेलीफोन बिल आदि की भी सुविधा प्राप्त होती है। एसडीएम के रिटायर होने पर पेंशन भी मिलती है।

डिप्टी कलेक्टर को फ्री इलाज का भी लाभ मिलता है, घर में काम करने के लिए नौकर जैसे माली, रसोईया आदि भी होते हैं। 

#2: डिप्टी कलेक्टर की सैलरी (Deputy Collector Salary In India)

डिप्टी कलेक्टर की सैलरी शुरुआत में हर महीने लगभग 55 हजार रुपए तक होती है तथा एसडीएम की तरह ही डिप्टी कलेक्टर की सैलरी भी बढ़ाई जाती है। इसी तरह डिप्टी कलेक्टर की सैलरी कुछ समय बाद 1 लाख रुपए हर महीने तक हो जाती है।

डिप्टी कलेक्टर को भी एसडीएम की तरह अच्छी सुविधा और अधिकार मिलते हैं। डिप्टी कलेक्टर को रहने के लिए घर, सरकारी गाड़ी और ड्राइवर, फ्री बिजली बिल, फ्री टेलीफोन बिल का भी फायदा मिलता है।

इसके अलावा डिप्टी कलेक्टर अन्य खर्चो के लिए आवश्यक भत्ते प्रदान करने की भी सुविधा हैं। डिप्टी कलेक्टर को भी फ्री इलाज, पेंशन मिलती है।

एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर के कार्यों के बीच अंतर (Difference Between Work Of Deputy Collector And SDM)

आपको बता दें कि सबसे ज्यादा अंतर एसडीएम के कार्यों और डिप्टी कलेक्टर के कार्यों के बीच होता है। तो आइए एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर के कार्यों के बीच के अंतर को जाने।

#1: एसडीएम का क्या काम होता है? (SDM Ka Kya Kaam Hota Hai)

एसडीएम के कार्य प्रशासनिक सेवा में बहुत महत्वपूर्ण होते है, तो आइए एसडीएम के कार्यों के बारे में जानते हैं।

  • एसडीएम अपने अधिकार क्षेत्र के अधिकारियों और तहसीलदारों से संबंध बनाए रखता है, उनके कार्यों के बारे में भी जानकारी रखता है।
  • एसडीएम को वाहन पंजीकरण (Vehicle Registration) के कार्य करता है।
  • राजस्व के काम भी एसडीएम को सौंपे जाते है।
  • चुनाव के समय भी एसडीएम बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • ड्राइविंग लाइसेंस, मैरिज रजिस्ट्रेशन आदि के काम भी एसडीएम करता है।
  • हथियारों के लाइसेंस और अन्य सर्टिफिकेट एससी, एसटी, ओबीसी जैसे सर्टिफिकेट जारी करने का काम भी एक एसडीएम का होता है।
  • जब भी विधानसभा और लोकसभा चुनाव होते है, उस समय एसडीएम चुनाव सही से करवाने का काम करता है।
  • एसडीएम एक या अधिक तहसीलों में कानून व्यवस्था बनाए रखने का कार्य करता है।

यहां तक आपने एसडीएम के कार्यों के बारे में जाना है, अब SDM Ka Kya Power Hota Hai के बारे में जानेंगे।

  • एसडीएम के पास किसी को गिरफ्तार करने के आदेश देने का अधिकार होता है।
  • एसडीएम दंगो के समय लाठी चार्ज करने का भी आदेश दे सकते है।
  • एक एसडीएम के पास न्यायिक और दंड देने की शक्तियां होती है।
  • एसडीएम के पास कार्य करने की शक्तियां होती है, यानी एसडीएम को कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए परमिशन नहीं लेनी पड़ती है।

#2: डिप्टी कलेक्टर का क्या काम है? (Deputy Collector Kya Kaam Karta Hai)

एसडीएम की तरह डिप्टी कलेक्टर भी प्रशासनिक सेवा के कई कार्यो में अपना योगदान देता है, डिप्टी कलेक्टर के कार्यों का वर्णन कुछ इस प्रकार है।

  • जब भी कोई चुनाव होते हैं तो डिप्टी कलेक्टर चुनाव अधिकारियों की सहायता करता है।
  • लाइसेंस नवीनीकरण के कार्य भी डिप्टी कलेक्टर द्वारा किए जाते हैं।
  • अपने अधिकार क्षेत्र में अधिकारियों के बारे में जानकारी रखना।
  • डिप्टी कलेक्टर भूमि राजस्व के कार्य भी करता है।
  • सैनिक कल्याण जैसे कार्य करना भी डिप्टी कलेक्टर की जिम्मेदारी होती है।
  • पुलिस स्टेशन से अपराधियों की फाइल मंगवाना और जांच करना डिप्टी कलेक्टर का कार्य है।
  • इस तरह डिप्टी कलेक्टर अपने विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य करता है।

जिस तरह एसडीएम के कार्य और शक्तियां होती है, उसी तरह डिप्टी कलेक्टर को कार्य और शक्तियां भी मिलती है। डिप्टी कलेक्टर की शक्तियां कुछ इस प्रकार है।

  • डिप्टी कलेक्टर का ज्यादातर कार्य भू राजस्व के कार्य करना होता है।
  • जिस तरह एसडीएम किसी को भी गिरफ्तार करने का आदेश दे सकता है, यह शक्ति डिप्टी कलेक्टर के पास नहीं होती है
  • डिप्टी कलेक्टर के कार्य राज्य सरकार या जिला कलेक्टर निर्धारित करता है।
  • जिला कलेक्टर के बाद डिप्टी कलेक्टर को जिले में ज्यादा उच्च पद माना जाता है। 
  • चुनावों में भी डिप्टी कलेक्टर को निर्वाचन अधिकारी भी बनाया जाता है।

एसडीएम एग्जाम पैटर्न और डिप्टी कलेक्टर एग्जाम पैटर्न में अंतर (Difference Between SDM And Deputy Collector Exam Pattern)

एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर एग्जाम पैटर्न में अंतर होता है, जो कि इस प्रकार है।

#1: एसडीएम एग्जाम पैटर्न (SDM Exam Pattern)

एसडीएम एग्जाम में पहले प्रीलिम्स एग्जाम, मेन्स एग्जाम और फिर आपका इंटरव्यू होगा। एसडीएम एग्जाम में प्रारम्भिक परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते है।

इसमें 2 पेपर होते है, हर पेपर 200 अंकों का होता है यानी कुल 400 अंकों की यह परीक्षा होती है।

मुख्य परीक्षा में कुल 9 पेपर होते है, जिसमें से 2 पेपर 300-300 अंकों के और बाकी 7 पेपर 250-250 अंकों के होते हैं। यह एक लिखित परीक्षा होती है, इसमें बड़े सवाल होते है जो आपको लिखने होते है।

सबसे आखिर में आपका इंटरव्यू होगा, जिसमें आपसे सिलेबस से जुड़े सवाल और आपकी पर्सनैलिटी जांचने के लिए भी कई सवाल पूछते है। यह 275 अंकों का इंटरव्यू होता है।

#2: डिप्टी कलेक्टर एग्जाम पैटर्न (Deputy Collector Exam Pattern)

इसमें प्रीलिम्स एग्जाम में भी बहुविकल्पीय प्रश्न होते है, इसमें 200-200 अंकों के कुल 2 पेपर होते है। यह परीक्षा पास करने के बाद आप मुख्य परीक्षा में जा सकते हैं।

मुख्य परीक्षा में 7 पेपर होते है, जिसमें से हर पेपर 200 अंकों का होता है। डिप्टी कलेक्टर मुख्य परीक्षा में भी बड़े सवाल आते हैं।

आखिर में तीसरे चरण में इंटरव्यू होगा जो कि 150 अंकों का होता है। इसके बाद ही कोई व्यक्ति डिप्टी कलेक्टर बन सकते है।

FAQs – एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर के बीच का अंतर

एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर के बीच के अंतर को जानने के बाद इससे जुड़े कुछ सवालों के बारे में भी पढे।

#1: डिप्टी कलेक्टर की तनख्वाह कितनी होती है?

डिप्टी कलेक्टर की सैलरी शुरुआत में लगभग 55 हजार रूपए होती है, समय के साथ डिप्टी कलेक्टर की सैलरी 1 लाख रुपए या इससे अधिक कर दी जाती है।

#2: एसडीएम बनने के लिए कौनसी परीक्षा होती है?

एसडीएम बनने के लिए आपको सिविल सर्विस एग्जाम पास करना पड़ता है। जिसमे प्रीलिम्स, मेन्स, इंटरव्यू होता है।

#3: एसडीएम बनने के क्या फायदे हैं?

एसडीएम बनने पर अच्छी सैलरी मिलती है, कानूनी अधिकार और शक्तियां मिलती है। इसके अलावा एसडीएम को रहने के लिए घर, वाहन, नौकर, सिक्योरिटी गार्ड और अन्य सरकारी सुविधाएं मुफ्त मिलती है।

निष्कर्ष – एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर के बीच का अंतर (SDM Aur Deputy Collector Mein Kya Antar Hai)

आज का यह आर्टिकल बहुत महत्वपूर्ण था, क्योंकि इसमें हमने एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर के बीच का अंतर (SDM Aur Deputy Collector Mein Kya Antar Hai) के बारे जाना है।

हम आशा करते है कि आपको SDM Aur Deputy Collector Mein Antar समझ आ गया होगा, क्योंकि आज हमने सारी जानकारी Deputy Collector VS SDM In Hindi में बताया है।

आज का यह आर्टिकल अच्छा लगा हो तो इसे आगे भी शेयर करें, कोई सवाल हो तो हमसे पूछ सकते है।

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